देश

आकाश विजयवर्गीय ने क्यों चलाया ताबड़तोड़ बल्ला? जानिए पूरी कहानी

कल से अब तक सैकड़ों बार आपने हर चैनल पर ये तो देख ही लिया होगा कि किस तरह मध्य प्रदेश के इंदौर में भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने जर्जर मकान को तोड़ने आये सरकारी अधिकारियों को दौड़ा दौड़ा कर बल्ले से मारा . इस घटना के बाद भाजपा की भारी फजीहत हो रही है . आकाश विजयवर्गीय भाजपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं .

विधायक के कृत्यों की सोशल मीडिया पर, न्यूज चैनलों पर खूब आलोचना की गई . आलोचना होनी भी चाहिए . इस तरह सरेआम क़ानून हाथ में लेकर हिंसा करना बहुत गलत है . किसी को अधिकार नहीं इस तरह से क़ानून हाथ में ले . लेकिन इसकी नौबत क्यों आई ? आखिर ऐसा क्या हुआ कि आकाश विजयवर्गीय को ये कदम उठाना पड़ा. जिस वक़्त विधायक आकाश विजयवर्गीय अपनी बल्लेबाजी से निगम कर्मचारियों की पिटाई कर रहे थे उन्हें जनता का भी समर्थन मिल रहा था. इसका मतलब ये हुआ कि निगम कर्मचारी कुछ ऐसा कर रहे थे जिससे जनता नाराज थी और जब विधायक ने निगम कर्मचारी पर दनादन बल्ला चलाना चुरू किया तो जनता ने समर्थन करना शुरू कर दिया. उस बल्लेबाजी वाली घटना को तो सबने देखा और चटखारे लिए . लेकिन उस घटना से पहले क्या हुआ, ये भी जानना जरूरी है. क्योंकि ये घटना मीडिया में छुपाया जा रहा है. हमारा भी मानना है कि इस तरह से हिंसा करना गलत है . किसी को हक नहीं क़ानून हाथ में लेने का लेकिन पूरी जानकारी भी सामने आनी जरूरी है.

मौके पर मौजूद महिलाओं का कहना है कि नगर निगम के अधिकारीयों ने जबरदस्ती मकान को तोड़ने की कोशिश की . जब उन्हें रोका गया तो उन्होंने महिलाओं के साथ बदसुलूकी शुरू कर दी. निगम अधिकारियों के साथ कोई महिला कर्मचारी नहीं थी लेकिन पुरुष कर्मचारी ही स्थानीय महिलाओं से उलझ गए .

हमने आकाश से उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने कहा – विधानसभा क्रमांक 3 में कुछ स्थान हैं, जहां सामान्य जनता कठिन परिस्थितियों में जीवन-यापन करने पर विवश है। रहने की जर्जर व्यवस्था, पीने का पानी नहीं या फिर दूषित पानी. अव्यवस्था व गंदगी से ग्रसित रहवासियों को डेंगू, मलेरिया व अन्य गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय विधायक होने के नाते, एक लंबे अरसे से, कई बार, इंदौर नगर निगम को लिखित व मौखिक रूप से इस विषय मे उचित व त्वरित समाधान की दिशा में कार्य करने का निवेदन किया. जिस मकान को निगम कर्मचारी जर्जर घोषित कर तोड़ने एक लिए आये थे . उसमे रहने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किये बिना ही उस मकान को तोडा जा रहा था .

आकाश ने ये भी बताया कि उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं के लिए कई बार निगम कार्यालय जा कर अधिकारियों से चर्चा करने का प्रयत्न किया तो जवाब मिला कि ” ये कांग्रेस का शाशन है, यहां कमलनाथ जी की चलती है, आपकी नहीं”!

वहां की स्थानीय महिलाओं ने भी बताया कि जब वो अपना घर छोड़ने को राजी नहीं हुई तो .. निगम कर्मचरियों ने उनके साथ बदसुलूकी की, उन्हें घसीटा गया जिसके . निगम कर्मचारी जो कागज़ ले कर मकान तोड़ने आये थे उसपर उसपर मेयर के हस्ताक्षर भी नहीं थे और फिर भी निगम कर्मचारी मकान तोड़ने पर अड़े थे . इसके बाद विधायक को गुस्सा आ गया और उन्होंने निगम कर्मचारियों पर बल्ला भांज दिया .

विधायक आकाश के बल्लेबाजी वाली घटना को खूब चलाया गया लेकिन उस घटना के पीछे क्या वजह थी उसे जानने की कोशिश किसी ने नहीं की . हालाँकि आकाश को ऐसा नहीं करना चाहिए था . लेकिन शायद उनके पास कोई और रास्ता न बचा हो .

आकाश पर धारा 353 लगाया गया है . ज्यादा दिन नहीं हुए जब इंदौर के ही वार्ड नंबर 2 के पार्षद मुबारिक मंसूरी ने निगम कर्मचारी से मारपीट की थी . इसका वीडियो भी उपलब्ध है . लेकिन चूंकि मंसूरी कांग्रेस के पार्षद थे तो उनपर मध्य प्रदेश सरकार ने कोई कारवाई नहीं की . क्या कमलनाथ सरकार एक ही तरह के दो घटनाओं को अलग अलग नजरिये से देख रही है ? या फिर कमलनाथ सरकार अपनी पार्टी के पार्षद को बचाने की कोशिश कर रही थी? ये तो गलत है . अगर एक ही तरह के दो मामले हैं हैं तो दोनों पर अलग नजरिया क्यों? ये सोचने वाली बात है.