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आज की चौपाल- 6 मार्च की अहम खबरों को यहां पढ़िए

आज की चौपाल में पढ़िए बड़े मुद्दे राम मंदिर पर आज सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ..वहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के लिए देश के सबसे स्वच्छ शहरों के नाम का ऐलान हो गया है..और एक बार फिर से पीएम मोदी कि दरियादिली सामने आई है..आईए इन सारी खबरों पर एक नजर डालते है..

1.सबसे पहले बात सदियों से चले आ रहे विवाद राम मंदिर पर करेंगे… अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता पर सुनवाई हुई जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है..सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों से कहा कि अगर संभव हो सके तो इस मामले को मध्यस्थता से ही सुलझाया जाए. हालांकि, अयोध्या मामले में पहली बार मध्यस्थता की कोशिश नहीं है. इससे पहले तीन बार ऐसी कोशिशे हो चुकी हैं, लेकिन विवाद किसी नतीजे के मुकाम तक नहीं पहुंच सकी. हालांकि ये पहली बार होगा जब कोर्ट की निगरानी में मध्यस्थता की पहल की जाएगी.

बता दें, पहली कोशिश 90 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के समय में हुई थी, दोनों हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों से बातचीत के सिलसिले भी शुरू हो गए थे. ऐसा लग रहा था कि अयोध्या विवाद हल हो जाएगा और समझौते का ऑर्डिनेंस भी लाया जा रहा था. लेकिन सियासत ने ऐसी करवट ली कि वीपी सिंह को अयोध्या विवाद को सुलझाने वाले ऑर्डिनेंस को वापस लेना पड़ा था.

फिर उसके बाद वीपी सिंह के अयोध्या विवाद के समाधान की दूसरी पहल तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के दौर में शुरू हुई . लेकिन दुर्भाग्य था कि उनकी सरकार चली गई. उसके बाद नरसिम्हा राव की सरकार ने सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी अंतिम हल तक नहीं पहुंचा जा सका.

हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में कांची पीठ के शंकराचार्य के जरिए भी अयोध्या विवाद सुलझाने की कोशिश की थी. और भरोसा दिलाया गया था कि मसले का हल महीने भर में निकाल लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद भी हल नही निकला..

हालांकि, व्यक्तिगत स्तर पर भी अयोध्या मामले की कई बार समझौते की पहल की जा चुकी हैं.

2…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर मिसाल पेश की है..पीएम मोदी ने अपनी निजी बचत को दान कर दिया है..अपनी 21 लाख की बचत को कुंभ सफाई कर्मचारी कॉरपस फंड को दान कर दिया है..

प्रधानमंत्री मोदी पहले भी अपनी सैलरी और अन्य सम्मान से मिलने वाली राशि दान करते रहे हैं. बता दें कि पिछले महीने पीएम मोदी ने सियोल शांति पुरस्कार से मिली करीब डेढ़ करोड़ की राशि भी नमामि गंगे के लिए दान कर दी थी.

पीएम मोदी अपने विचारों और अपने दयालुता के कई उदाहरण पेश करते रहते है..पिछले दिनों पीएम मोदी कुंभ मेले में शामिल हुए थे..उन्होंने कुंभ मेले में यात्रा के दौरान सफाईकर्मियों के पैर भी धोए थे, जो सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ था.

इससे पहले, अप्रैल 2015 में नेपाल में आए भूंकप के बाद पीड़ितों की मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी 1 महीने की सैलरी प्रधानमंत्री राहत कोष में दान की थी.

मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने अपने गृह राज्य गुजरात के सरकारी ड्राइवरों और चपरासियों की कन्याओं के कल्याण के लिए एक खास तरह का कोष शुरू करने के लिए अपनी निजी बचत से 21 लाख रुपये दान कर दिया था.

इससे पहले 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद मिले 18,710 गिफ्ट को उन्होंने दान कर दिया था, इन उपहारों की नीलामी से करीब 90 करोड़ की राशि एकत्र हुई और इसके जरिए कन्या शिक्षा के लिए कोष बनाया गया.

3..राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के लिए देश के सबसे स्वच्छ शहरों के नाम का ऐलान किया..इसमें मध्य प्रदेश का इंदौर लगातार तीसरी बार देश के सबसे साफ़ शहरों में चुना गया. जबकि भोपाल ने देश की सबसे साफ़ राजधानी कैटेगरी में बाजी मारी है.

वहीं 10 लाख की आबादी वाली कैटेगरी की बात करें तो इसमें गुजरात के अहमदाबाद और 5 लाख की आबादी वाले शहर में मध्य प्रदेश के उज्जैन को सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है.

गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के तहत सात कैटेगरी में पुरस्कार दिए गए हैं. इनमें सबसे स्वच्छ शहर, सबसे स्वच्छ बड़ा शहर (जिसमें 10 लाख से ज्यादा आबादी वाला शहर है),  सबसे स्वच्छ मध्यम आबादी वाला शहर, सबसे स्वच्छ छोटा शहर, सबसे स्वच्छ राजधानी, सबसे स्वच्छ कैंटोनमेंट, सबसे स्वच्छ गंगा टाउन कैटगिरी शामिल थी.

गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 की कैटेगरी में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश के शहरों ने खिताब जीते हैं. वही, उत्तराखंड के गौचर ने सबसे स्वच्छ गंगा टाउन कैटगिरी में खिताब हासिल किया हैं..स्वच्छता में दिल्ली भी पिछे नहीं रहा… स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 में सबसे स्वच्छ कैंटोनमेंट एरिया में दिल्ली कैंट को चुना गया है. जबकि सबसे स्वच्छ निगम में एनडीएमसी दिल्ली को सबसे साफ़ चुना गया..

इस आकड़े को देख तो यही लगता है स्वच्छ भारत मिशन का दिल्ली पर प्रभाव बहुत रहा…क्योंकि पिछले रिकॉर्ड को देखे तो दिल्ली इस बार स्वच्छता में काफी तेजी से आगे बढ़ा है..और इसकी एक मुख्य वजह स्वच्छ भारत मिशन को भी माना जा रहा है…