चुनाव 2019 पोल खोल

शेखर गुप्ता का खुलासा: मोदी की योजनाओं की सफलता को जानबूझ कर किया गया नज़रअंदाज

लोकसभा चुनाव में भाजपा कि शानदार जीत के एक हफ्ते बाद भी इस बात पर विश्लेषण किया जा रहा है कि कैसे भारतीय जनता पार्टी इतने प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापस आ गई . आखिर ऐसी कौन सी कड़ी रही जिसे ना तो विपक्ष पकड़ पाया और ना हो वो मीडिया संसथान जिन्होंने पुरे पांच साल देश में डर का माहौल है  और देश में मुसलमानों को डर लगता है जैसी ख़बरें चलाई और उरी जैसी फिल्मों को भी जहरीला राष्ट्रवाद और सरकार का प्रोपेगैंडा बता कर खारिज कर दिया था. उन्ही मीडिया संस्थानों में से एक द प्रिंट के प्रसिद्द पत्रकार हैं शेखर गुप्ता. शेखर गुप्ता द प्रिंट वेब पोर्टल के मालिक हैं और साथ ही साथ एडिटर गिल्ड के चीफ भी हैं .

चुनावों परिणामों पर विश्लेषण के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया How India Voted . इस कार्यक्रम में कई चुनाव विश्लेषकों ने हिस्सा लिया. जैसे आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता योगेन्द्र यादव . इसी कार्यक्रम में शेखर गुप्ता भी उपस्थित थे . कार्यक्रम में बोलते हुए गुप्ता जी ने स्वीकार किया कि उनलोगों ने केंद्र सरकार की योजनाओं को कम कर के आंका , साथ ही कई मीडिया संस्थानों ने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता को नजरअंदाज किया क्योंकि वो इसे सफल मानना नहीं चाहते थे .

शेखर गुप्ता ने कार्यक्रम से स्वीकार किया कि वो खुद मोदी सरकार की योजनाओं में कमियां खोज रहे थे और उन योजनाओं के खिलाफ सबूत ढूंढ रहे थे लेकिन उन्हे कोई सबूत नहीं मिला . उन्होंने उज्जवला योजना का जिक्र करते हुए कहा कि उज्ज्वला की असफलता ढूँढने के लिए घरों में झांकते थे लेकिन घरों में गैस सिलिंडर पा कर उनकी योजना असफल हो जाती थी .

शौचालय बनवाने के लिए लोगों को 15 हज़ार रुपये दिए गए . अगर लोग घर बनवा रहे थे तो सरकार उन्हें पैसे दे रही थी. और ये सब डायरेक्ट उनके अकाउंट में ट्रांसफर हो रहा था . शेखर गुप्ता ने इस बात का भी  खुलासा किया कि उन्होंने अपने मोबाईल में करीब 60 लोगों की बातचीत रिकार्डिंग की जिसने कर्नाटक, बिहार और बंगाल के लोग थे.और सबसे बड़ी बात ये थी कि इन सभी 60 लोगों ने मोदी को वोट दिया था . इसका सबसे बड़ा कारण ये था कि लोगों ने सरकार को काम डिलीवर करते देखा था .सरकार उन चीजों की डिलीवरी कर रही थी जो लोगों ने बिना रिश्वत दिए पाने की कल्पना भी नहीं की थी .

मुद्रा लोन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैं इसे बकवास समझता था .ये ऐसी योजना थी जो व्यवहारिक नहीं हो सकती थी लेकिन मैंने अपने मोबाईल में रिकार्डिंग किया कि आजमगढ़ से 60 किलोमीटर दूर बैठी महिला को चाय दूकान के लिए 50 हज़ार का मुद्रा लोन मिला . बकौल शेखर गुप्ता . उन्होंने आँकड़ों की जांच पड़ताल की और पाया कि करीब 4.81 करोड़ लोगों को मुद्रा लोन दिया जा चुका है . उनमे से कई लोगों से वो खुद मिले .इन लोगों ने मोदी को वोट दिया

उन्होंने ये खुल कर स्वीकार किया उन जैसे कुछ पत्रकारों ने सरकार के किये काम को देखने की बजाये , नहीं देखने को प्राथमिकता दी और इसी आधार पर हमने ये धारणा बना ली कि उन्हें एक गैस सिलिंडर मिल गया लेकिन अगले के लिए क्या करेंगे ? पत्रकारों ने ये देखा कि वो अगला सिलिंडर कैसे भरवाएंगे .ये नहीं देखा कि उन्हें सरकार ने एक सिलेंडर दिया , एक चूल्हा दिया. पत्रकारों ने झूठ बोला कि अगले सिलेंडर के लिए पुरे पैसे देने पड़ेंगे, जबकि सच ये था कि पुरे पैसे देने के बाद सब्सिडी के पैसे अकाउंट में वापस आते थे .

शेखर गुप्ता ने ये स्वीकार किया कि देश में बहुत बड़ा बदलाव आया है और देश के लोगों ने इसे स्वीकार किया है .क्योंकि ये बदलाव उनके लिए नया है . इन चीजों के लिए शायद पहली बार उन्हें रिश्वत नहीं देनी पड़ी . हमें ये मानना पड़ेगा और इससे सीखना पड़ेगा. चुनाव परिणाम के बाद शेखर गुप्ता इन बातों को बता रहे हैं जबकि चुनाव के पहले तो सबका एक ही एजेंडा था सरकारी योजनाओं को सिरे से नकार दो . उन योजनाओं ने लोगों की ज़िन्दगी में बदलाव लाये लेकिन एक ख़ास मीडिया वर्ग ने उस बदलाव को देखने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि ये बदलाव मोदी की वजह से आया था .