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तबरेज की पत्नी को सरकारी नौकरी और अंकित सक्सेना के परिवार को 16 महीनों का इंतज़ार

झारखण्ड में तबरेज अंसारी को भीड़ ने चोरी के आरोप में बाँध कर पीटा और उसकी मौत पुलिस हिरासत में हो गई. पुरे देश में एक बार फिर लिंचिंग पर बहस शुरू हो गई . सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर हंगामा हुआ, प्लेकार्ड लहराए गए, ट्विटर पर say no to jai shri ram ट्रेंड चलाया गया, पीएम मोदी ने दुःख जताते हुए ट्वीट किया, लम्बे अरसे से गायब स्वरा भास्कर एक बार फिर लोगों को कैंडल मार्च के लिए आमंत्रित करने लगी और दिल्ली वक्फ बोर्ड ने तबरेज की पत्नी को 5 लाख का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की पेशकश की. दिल्ली वक्फ बोर्ड दिल्ली सरकार के अंतर्गत आता है और आम आदमी पार्टी के विधायक अमनातुल्लाह खान दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रमुख हैं . अमनातुल्लाह ने ये भी कहा कि वो चेक देने खुद जायेंगे.

अंकित सक्सेना याद है आपको, हाँ वही अंकित सक्सेना जिसकी हत्या दिल्ली में बीच रोड पर इसलिए कर दी गई थी क्योंकि उसने एक मुस्लिम लड़की से प्यार किया था . लड़की के घरवालों ने ही गला रेत कर अंकित को मार डाला था . दिल्ली सरकार ने अंकित के माता-पिता को भी हर संभव मदद और 5 लाख का मुआवजा देने का ऐलान किया था . कुछ दिनों पहले ही अंकित के माता पिता ने ANI को बताया था कि उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली . अंकित परिवार का एकलौता लड़का था . उसके जाने के बाद परिवार किस मुश्किल से चल रहा था, ये सब अंकित के पिता ने ANI को बताया था . शायद अंकित के परिवार को देने के लिए दिल्ली सरकार के पास पैसे थे .

दिल्ली और झारखण्ड के बीच की दूरी करीब 1000 किलोमीटर है  . लेकिन जब सवाल वोटबैंक का हो तो दूरियां मिट जाती है . दिल्ली की केजरीवाल सरकार से दिल्ली में चंद किलोमीटर का फासला तय नहीं हो सका, उस केजरीवाल सरकार ने दिल्ली से झारखण्ड के बीच के फासले मिटा दिए . जिस केजरीवाल सरकार के पास अंकित सक्सेना के परिवार को देने के लिए पैसे नहीं थे, उस केजरीवाल सरकार के पास तबरेज की पत्नी को देने के लिए पैसे और सरकारी नौकरी दोनों हैं. संवेदनाएं धर्म देख कर जगती है . खजाने का मुंह भी धर्म देख कर खुलता है .

इन्ही केजरीवाल के पास अंकित की हत्या के 5 दिनों बाद तक वक़्त नहीं था कि उसके घर जाएँ. इन्ही केजरीवाल ने उसकी श्रधांजलि सभा में मुआवजे का ऐलान यूँ किया मानों भीख बाँट रहे हो. कोई भूला नहीं होगा वो वायरल वीडियो जिसमे केजरीवाल कह रहे हैं कि मैं नहीं चाहता मुआवजे की रकम के ऊपर कोई वाद विवाद हो और जब पूछा गया कि जीवन यापन कैसे होगा तो उठ कर चले गए थे.

16 महीने हो गए अंकित कि हत्या के, अंकित के पिता का जब ANI को दिया इंटरव्यू सामने आये तो केजरीवाल सरकार चौतरफा घिर गई . उसके बाद तबरेज आलम के परिवार को तुरंत सहायता के ऐलान के बाद तो सोशल मीडिया पर केजरीवाल पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया जाने लगा . आलोचनाओं के बाद आखिरकार केजरीवाल सरकार होश में आई और अंकित सक्सेना के परिवार को 16 महीनों बाद 27 जून को चेक सौंपा गया. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद जा कर अंकित के माता –पिता को 15 लाख का चेक सौंपा .

ये वो लोग हैं जिन्होंने दावा किया था कि वो राजनीति बदलने आये हैं. ये वो लोग हैं जिन्होंने कहा था वो व्यवस्थाएं बदलने आये हैं लेकिन खुद बदल गए. राजनीति बदलने और व्यवस्थाएं बदलने से वोट नहीं मिलते इसलिए खुद ही बदलना पड़ता है.

कितना आसान हो जाता है न सब कुछ अगर पीड़ित मुस्लिम हो तो. आपके समर्थन के लिए प्लेकार्ड लहराने वाले गैंग सक्रीय हो जाते हैं, कैंडल मार्च गैंग सक्रीय हो जाते हैं, ट्विटर पर आउटरेज चलाने वाले गैंग सक्रीय हो जाते हैं और राजनीतिक दल तो हैं ही आपके लिए अपने खजाने का मुंह खोलने के लिए .