राजनीति

आरिफ मोहम्मद खान ने उड़ाई द वायर की धज्जियाँ

दो दिनों पहले नयी लोकसभा के पहले सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर हमले किये थे . अक्सर मोदी सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप विपक्ष की तरफ से लगाया जाता है. पीएम मोदी ने शाहबानों प्रकरण का जिक्र करते हुए कांग्रेस को निशाने पर लिया और कांग्रेस के एक नेता का बयान संसद में दोहराया – ‘कांग्रेस के एक नेता ने कहा था कि मुसलमानों के उत्थान की ज़िम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है, अगर वो गटर नें रहकर जीना चाहते हैं तो रहें.’

पीएम मोदी ने जब लोकसभा में ये बयान दिया तो हंगामा हो गया. हालाँकि पीएम मोदी ने कांग्रेस के उस नेता का नाम नहीं लिया लेकिन जब नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो यूट्यूब लिंक भेज देंगे. पीएम मोदी के जिक्र के बाद कांग्रेस नेता के उस बयान को यूट्यूब पर सर्च किया जाने लगा … अचानक से आरीफ मोहम्मद खान सुर्ख़ियों में आ गए. आरिफ मोहम्मद खान, राजीव गाँधी सरकार में मंत्री थे और तीन तलाक के विरोधी रहे हैं. जब शाहबानों प्रकरण में राजीव गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पल्टा तो आरीफ मोहम्मद खान ने इस्तीफ़ा दे दिया था. उसके बाद उन्हें मनाने पीवी नरसिम्हा राव आये.

ANI से बात करते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा – पीवी नरसिम्हा राव मुझे मनाने आये, नरसिम्हा राव जी ने ख़ुद मुझसे कहा है कि मुसलमान हमारे वोटर हैं, हम इन्हें क्यों नाराज़ करें. हम इनके सामाजिक सुधारक नहीं हैं. कांग्रेस पार्टी समाज सुधार का काम नहीं कर रही है. हमारा रोल समाज सुधारक का नहीं है. हम राजनीति के बिज़नेस में हैं और अगर ये गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहने दो.”

जब आरिफ मोहम्मद खान पीएम मोदी के बयान के बाद चर्चा में आ गए तो द वायर ने 27 जून को उनका एक इंटरव्यू किया. इंटरव्यू लिया द वायर की पत्रकार आरफा खानम ने. आरफा ने बड़ी चतुराई से ये नैरेटिव क्रियेट करने की कोशिश की, कि मोदी की सरकार में मुस्लिम डर में जी रहे हैं और ये सरकार मुसलामानों की भलाई के लिए नहीं सोच रही. आरफा खानम ने ये भी कहा कि मोदी सरकार की पूरी राजनीति मुस्लमान विरोधी पिलर पर टिकी है क्योंकि 303 सांसदों में से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है. लेकिन आरिफ मोहम्मद खान ने उनके सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुसलमानों को वोटबैंक बना कर कांग्रेस ने रखा तो मुसलमानों के आज जो हालात हैं उसकी जिम्मेदारी भी कांग्रेस की है. कांगेस ने हमेशा मुस्लिमों के लिए दोहरा रवैया रखा.

आरफा खानम ने पूछा कि लोग ये चिंता जता रहे हैं कि भारत एक सेक्युलर राष्ट्र से हिन्दू राष्ट्र की और बढ़ता जा रहा है, तो आरिफ मोहम्मद ने जवाब दिया कि क्या आपने कभी उन राष्ट्रों पर सवाल उठाये जो इस्लामिक हैं. जब आरफा ने ये कहा कि एक हिन्दू राष्ट्र में अन्य धर्म दोयम दर्जे के बन जायेंगे तो आरिफ मोहम्मद खान ने जवाब देते हुए कहा कि भारत में पारसी लोग भी हैं जिनका संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है लेकिन वो रोते नहीं प्रतिनिधित्व के लिए.

अरफा ने मुसलमानों की गरीबी पर सवाल उठाये तो आरिफ ने जवाब देते हुए कहा कि मुसलमान की गरीबी के लिए उसकी अपनी दकियानूसी सोच जिम्मेदार है. अपने हर सवाल से आरफा मुसलमानों को खतरे में बताने की कोशिश करती रहीं. लेकिन आरिफ मोहम्मद खान ने उनके सभी सवालों को अपने तर्कों से काट कर रख दिया. आरिफ मोहम्मद खान ने तो यहाँ तक कहा कि आप पाकिस्तान, सीरिया या फिर ईराक में रह कर देख लीजिये आपको पता चल जाएगा कि कौन सा मुल्क मुसलमानों के लिए बेहतर है. आरिफ मोहम्मद खान ने 2007 में ही राजनीती से संन्यास ले लिया था लेकिन इन दिनों वो एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं.

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